राम कथा रूपी मान सरोवर का वर्णन बालकांड भाग आठ (8)

जय श्री राम जी
       इस भाग मे तुलसीदास जी राम चरित मानस की महिमा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि यह दैहिक दैविक और भौतिक तीनों प्रकार के दोष दुख और दरिद्रता को भस्म करने वाला और कलि के कुचालों सहित कलि के समस्त पापों का नाश करने वाला है।
    
       इसे पहले शिवजी ने रच कर अपने मन मे रखा और  अच्छा समय पा कर श्री पार्वती जी से कहा। इस कारण अपने मन में प्रसन्न हो कर श्री शिवजी ने इसका वही श्रेष्ठ नाम रामचरित मानस ही रखा।

       तुलसीदास जी कहते हैं कि इस राम चरित मानस का प्रबन्ध  मान सरोवर की तरह है जो गम्भीर ह्रदय के भीतर सुन्दर बुद्धि है  वही भूमि तल है वेद पुराण समुद्र हैं और सन्त लोग बादल के समान  हैं । भगवान की सुन्दर लीलाओं का वर्णन ही इसकी स्वच्छता शीतलता और मधुरता है

        इस मे जो  चार सुन्दर संवाद हैं  वे सुन्दर सरोवर के चार एसे घाट हैं जो सहसा ही मन को  लुभा लेते हैं ।
वे चार मधुर सम्वाद यह हैं शिव पार्वती संवाद , काक भुशुण्डी गरूड़  संवाद , ॠषी याज्ञवल्क्य भरद्वाज संवाद , गोस्वामी तुलसीदास और श्रोता संवाद । इनमे जो सात काण्ड हैं वही इस मान सरोवर की सात सीढियां हैं । राम कथा ही इसमें शुद्ध और स्वच्छ जल है। इसमें  जो चौपाइयाँ है वो इसमें खिले कमल की तरह है । छन्द सौरठे व दोहे सुन्दर तरंगे हैं ।

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जरा श्री राम 🙏🙏🙏🙏🙏


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