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balkand Bhag 17

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भगवान शिव और पार्वती की शादी बड़े ही अनोखे ढंग से आयोजित हुई। हिमाचल की तरफ से कई सारे उच्च कुलों के  राजा-महाराजा और शाही रिश्तेदार इस शादी में शामिल हुए, लेकिन शिव की ओर से कोई रिश्तेदार नहीं था, क्योंकि वे  किसी भी परिवार से ताल्लुक नहीं रखते थे।         सप्तर्षियों द्वारा विवाह की तिथि निश्चित कर दिए जाने के बाद भगवान्‌ शंकरजी ने नारदजी द्वारा सारे देवताओं को  विवाह में सम्मिलित होने के लिए आदरपूर्वक निमंत्रित किया और अपने गणों को बारात की तैयारी करने का आदेश दिया।        ब्रहमा जी और विष्णु जी अपनी अपनी मण्डली के साथ शंकर जी के विवाह में पधारे ।        नंदी , क्षेत्रपाल, भैरव आदि गणराज सभी कोटि-कोटि गणों के साथ निकल पड़े। ये सभी तीन नेत्रों वाले थे। सबके  मस्तक पर चंद्रमा और गले में नीले चिन्ह थे। सभी ने रुद्राक्ष के आभूषण पहन रखे थे। सभी के शरीर पर उत्तम भस्म पुती  हुई थी।        इन गणों के साथ शंकरजी के भूतों, प्रेतों, पिश...

शिव पार्वती विवाह। बालकांड भाग 15, 16, 17

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भगवान शिव और पार्वती की शादी बड़े ही अनोखे ढंग से आयोजित हुई। हिमाचल की तरफ से कई सारे उच्च कुलों के  राजा-महाराजा और शाही रिश्तेदार इस शादी में शामिल हुए, लेकिन शिव की ओर से कोई रिश्तेदार नहीं था, क्योंकि वे  किसी भी परिवार से ताल्लुक नहीं रखते थे।         सप्तर्षियों द्वारा विवाह की तिथि निश्चित कर दिए जाने के बाद भगवान्‌ शंकरजी ने नारदजी द्वारा सारे देवताओं को  विवाह में सम्मिलित होने के लिए आदरपूर्वक निमंत्रित किया और अपने गणों को बारात की तैयारी करने का आदेश दिया।        ब्रहमा जी और विष्णु जी अपनी अपनी मण्डली के साथ शंकर जी के विवाह में पधारे ।        नंदी , क्षेत्रपाल, भैरव आदि गणराज सभी कोटि-कोटि गणों के साथ निकल पड़े। ये सभी तीन नेत्रों वाले थे। सबके  मस्तक पर चंद्रमा और गले में नीले चिन्ह थे। सभी ने रुद्राक्ष के आभूषण पहन रखे थे। सभी के शरीर पर उत्तम भस्म पुती  हुई थी।        इन गणों के ...

शिव जी द्वारा कामदेव का भस्म होना बालकांड भाग 14

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जय भोले नाथ         सती ने पार्वती के रूप में जन्म लेकर शिवजी को पाने के लिए तपस्या की। कई वर्षो की तपस्या के पश्चात आकाश वाणी हुई कि हे गौरी आप की तपस्या सफल हुई शीघ्र ही आपको शिवजी प्राप्त होगे। अतः अब तुम अपने पिता के घर जाओ।        लेकिन उधर भगवान भोलेनाथ अपनी समाधि में मग्न थे। देवता लोग सोचने लगे कि कैसे शंकर जी को समाधि से जगाया जाए। तब उन्होंने कामदेव को शिव जी की समाधि भंग करने के लिए भेजा। कामदेव ने बहुत प्रयत्न किए किन्तु वह शिवजी की समाधि भंग ना कर सका। अतः अन्त में उसने शिवजी पर पुष्प बाण चला दिया जिस से शिवजी की समाधि खुल गई । शिवजी को क्रोध आया और उन्होंने तीसरे नेत्र से जब कामदेव को देखा तो वह जल कर भस्म हो गया। देवताओं मे हाहाकार मच गया। सारी सृष्टि उदास हो गई। कामदेव की पत्नी रति ने शिवजी से अपने पति को जीवित करने की प्रार्थना की । तब शिवजी ने दया करके रति को आश्वस्त किया कि तुम्हारे पति बिना शरीर के जीवित रहें गे। द्वापर युग में श्री कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न  के रूप में जन्म लेंगे तब तुम अपने पति...

सती जी का तप सफल होना। बालकांड भाग 13

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जय माॅ  अम्बिका         सती जी  ने दक्ष के यज्ञ में अपना शरीर त्यागने के पश्चात राजा हिमाचल के घर गौरी रूप में जन्म लिया और शंकर जी को पति रूप में प्राप्त करने के लिए तप किया । मन के तप में लीन रहने से देह की सुद्धि बिसर गई।       1000 वर्ष तक पार्वती ने कंदमूल और  फल खाकर तप किया । 100 वर्ष तक केवल  शाक खाकर तप किया । फिर  कुछ दिन केवल जल और वायु का सेवन किया । 3000 वर्ष तक सूखी बेल पत्तियों का भोजन किया । तथा उसके  वह भी छोड़ कर भूखी प्यासी रह कर ही तपस्या की। तभी से उनका नाम अपर्णा पड़ा ।        जब उनका शरीर अत्यंत क्षीण हो गया तब आकाश वाणी हुई कि हे गिरिराज कुमारी तुम्हारा तप सफल हुआ अब आपको शीघ्र ही त्रिपुरारी मिलें गे। अब तुम अपने पिता के  साथ घर चली जाओ। शीघ्र ही इस आकाश वाणी के प्रमाण स्वरूप सप्त ॠषी तुम्हारे पास आएंगे ।       उधर जब से सती ने शरीर त्यागा तब से शिवजी पूर्ण वैराग हो गए थे। सदैव प्रभू राम के ध्यान में मग्न रहते। तब ...

शिव के लिए पार्वती का तपस्या करना बालकांड भाग 12

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जय माॅ पार्वती         सती जी ने मरते समय यह वरदान माँगा था कि जन्म जन्म तक मेरी शिवजी के चरणों में प्रीती बनी रहे। अतः उन्होंने राजा हिमाचल के घर गौरी रूप में जन्म लिया और शंकर जी को पति रूप में प्राप्त करने के लिए तपस्या किया ।        गौरी को पुत्री के रूप में प्राप्त करने के पश्चात हिमाचल के घर नित्य नए मंगल होने लगे। गौरी जन्म का समाचार सुनकर  नारद मुनि भी हिमाचल के घर पधारे। हिमाचल ने उनका बड़ा स्वागत किया । रानी मैंने सहित मुनि के चरणों में प्रणाम किया । फिर अपनी पुत्री पार्वती को बुला कर उसे आशीर्वाद देने को कहा। अपनी पुत्री के गुण दोषों को जानने की इच्छा प्रकट की।        तब नारद मुनि  ने कहा कि आपकी कन्या सब गुणों की खान है । यह स्वभावतः सुशील और बुद्धिमती है। तथा इनके नाम उमा, भवानी, पार्वती , अम्बिका है। आपकी यह कुमारी सर्वगुण सम्पन्न है। यह अपने पति की अत्यंत प्रिय होगी इसका सौभाग्य सदा अटल होगा तथा इसके माता पिता को जगत में सर्वदा यश प्राप्त होगा।    ...

दक्ष के यज्ञ में सती दहन बालकांड भाग 11

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जय श्री राम  जय भोले नाथ  जय माॅ सती                   श्री राम की परीक्षा लेने के पश्चात शंकर जी ने सती को त्याग दिया और तपस्या करने बैठ गए तब सती जी जान गई कि स्वामी ने मुझे त्याग दिया है। वे इस दुख को सह नही पा रही थी और मन ही मन  बहुत  ही पश्चाताप करने लगी। कि मैंने रघुनाथ जी का अपमान  किया और पति के वचनों पर संदेह किया इसी से विधाता ने  मुझे यह दारुण दुःख दिया। जब शंकर जी कई सालों तक तप से नहीं जागे तो सती जी ने प्रभू श्री राम जी से मन ही मन यह बिनती की कि हे प्रभू यदि आप सच में  दीन दयालु कहलाते हो तो कुछ एसा उपाय करो कि मेरा यह शरीर शीघ्र ही नष्ट हो जाए क्योंकि पति के त्याग के  बाद मैं जीवित नही रहना चाहती। सती जी इस प्रकार इस दारूण दुख के साथ  समय बिताने लगी।        उधर 87 हजार साल व्यतीत होने पर शंकर जी की समाधि खुली। और वे राम राम का सुमिरिन करने लगे। स्वामी को समाधि से जागा देख सती जी उनके चरणों में जा पढ़ी। तब शंकर जी ने ...

सती जी का राम जी की परीक्षा लेना। बालकांड भाग 10

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जय श्री राम         एक बार  भगवान  भोले नाथ सती जी  के साथ कैलाश पर्वत की ओर  जा रहे थे। उसी समय प्रभू  श्री  राम अपने बनवास काल मे दण्डक वन में विचरण कर रहे थे। और सीता  जी की खोज  मे दोनों  भाई दुखी  दिखाई  दे रहे थे। शंकर  जी अपने मन में विचार करते जा रहे थे कि कैसे प्रभू  के दर्शन  होंगे । क्योंकि इस अवतार में प्रभू राम गुप्त रूप में  प्रकट हुए थे।  तभी मार्ग में  राम जी से भेंट हुई। श्री राम ने पिता  सहित  अपना नाम बताया और शंकर जी को प्रणाम किया। उधर  शंकर  जी भी  प्रभू  राम की जय बुला कर सती जी के साथ  अपने रास्ते चल दिए । शंकर जी मन ही मन आनंदित हो रहे थे। अपने प्रभू के दर्शन से उनके मन मे प्रेम समा नही रहा था।        शंकर जी की यह दशा सती जी से छुपी ना थी। उनके  मन में संदेह उत्पन्न हो गया कि शंकर जी तो अविनाशी हैं सारा जगत उन्हें पूजता है तो उन्होंने एक राजा के बेटे को सच्चिदानन्द कह ...