शिव के लिए पार्वती का तपस्या करना बालकांड भाग 12
जय माॅ पार्वती 


सती जी ने मरते समय यह वरदान माँगा था कि जन्म जन्म तक मेरी शिवजी के चरणों में प्रीती बनी रहे। अतः उन्होंने राजा हिमाचल के घर गौरी रूप में जन्म लिया और शंकर जी को पति रूप में प्राप्त करने के लिए तपस्या किया ।
गौरी को पुत्री के रूप में प्राप्त करने के पश्चात हिमाचल के घर नित्य नए मंगल होने लगे। गौरी जन्म का समाचार सुनकर नारद मुनि भी हिमाचल के घर पधारे। हिमाचल ने उनका बड़ा स्वागत किया । रानी मैंने सहित मुनि के चरणों में प्रणाम किया । फिर अपनी पुत्री पार्वती को बुला कर उसे आशीर्वाद देने को कहा। अपनी पुत्री के गुण दोषों को जानने की इच्छा प्रकट की।
तब नारद मुनि ने कहा कि आपकी कन्या सब गुणों की खान है । यह स्वभावतः सुशील और बुद्धिमती है। तथा इनके नाम उमा, भवानी, पार्वती , अम्बिका है।
आपकी यह कुमारी सर्वगुण सम्पन्न है। यह अपने पति की अत्यंत प्रिय होगी इसका सौभाग्य सदा अटल होगा तथा इसके माता पिता को जगत में सर्वदा यश प्राप्त होगा।
यह सारे संसार मे पूज्य होगी। इसकी सेवा करने से संसार की हर दुर्लभ वस्तु प्राप्त होगी। इसके नाम को जप कर संसार की स्त्रियाँ पतिव्रत धर्म का पालन करेंगी।
हे हिमालय राज आपकी कन्या सुलक्ष्णी है। परन्तु जो थोड़े अवगुण हैं अब वह भी सुनिए । इसे निरगुन, मान रहित, माता पिता से विहीन, उदासीन, सब संदेह से रहित, योगी, जटाधारी, निष्काम चित, नग्न शरीर, एसा अमंगल भेष वाला पति मिले गा। क्योंकि इसके हाथ में ऐसी ही रेखा पड़ी है। नारद जी के यह वाक्य सुनकर माता पिता दुःखी हो गए परन्तु उमा ने मन में सुख माना।
हिमाचल और मैना को दुःखी देख कर नारद जी बोले कि जो ब्रम्हा जी ने ललाट पर लिख दिया वो तो अटल है तो भी मैं एक उपाय कहता हूं । जो जो मैंने वर के दोष बताए हैं वे सभी शंकर जी मे विद्यमान हैं। अगर पार्वती का विवाह शिवजी से हो जाता है तो यह सब अवगुण गुण ही माने जाएं गे । यदि तुम्हारी कन्या शिवजी को पाने के लिए तपस्या करे तो अवश्य ही शिवजी इन्हें अपनी पत्नी बनाएं गे। इतना कहकर नारद मुनि ब्रहम लोक को चले गए ।
हिमाचल और मैना बहुत दुखी थे। परन्तु उमा ने बहुत भांति से माता-पिता को समझाया और प्रसन्न मन से तप करने चल दी।
जय मां गौरी








सती जी ने मरते समय यह वरदान माँगा था कि जन्म जन्म तक मेरी शिवजी के चरणों में प्रीती बनी रहे। अतः उन्होंने राजा हिमाचल के घर गौरी रूप में जन्म लिया और शंकर जी को पति रूप में प्राप्त करने के लिए तपस्या किया ।
गौरी को पुत्री के रूप में प्राप्त करने के पश्चात हिमाचल के घर नित्य नए मंगल होने लगे। गौरी जन्म का समाचार सुनकर नारद मुनि भी हिमाचल के घर पधारे। हिमाचल ने उनका बड़ा स्वागत किया । रानी मैंने सहित मुनि के चरणों में प्रणाम किया । फिर अपनी पुत्री पार्वती को बुला कर उसे आशीर्वाद देने को कहा। अपनी पुत्री के गुण दोषों को जानने की इच्छा प्रकट की।
तब नारद मुनि ने कहा कि आपकी कन्या सब गुणों की खान है । यह स्वभावतः सुशील और बुद्धिमती है। तथा इनके नाम उमा, भवानी, पार्वती , अम्बिका है।
आपकी यह कुमारी सर्वगुण सम्पन्न है। यह अपने पति की अत्यंत प्रिय होगी इसका सौभाग्य सदा अटल होगा तथा इसके माता पिता को जगत में सर्वदा यश प्राप्त होगा।
यह सारे संसार मे पूज्य होगी। इसकी सेवा करने से संसार की हर दुर्लभ वस्तु प्राप्त होगी। इसके नाम को जप कर संसार की स्त्रियाँ पतिव्रत धर्म का पालन करेंगी।
हे हिमालय राज आपकी कन्या सुलक्ष्णी है। परन्तु जो थोड़े अवगुण हैं अब वह भी सुनिए । इसे निरगुन, मान रहित, माता पिता से विहीन, उदासीन, सब संदेह से रहित, योगी, जटाधारी, निष्काम चित, नग्न शरीर, एसा अमंगल भेष वाला पति मिले गा। क्योंकि इसके हाथ में ऐसी ही रेखा पड़ी है। नारद जी के यह वाक्य सुनकर माता पिता दुःखी हो गए परन्तु उमा ने मन में सुख माना।
हिमाचल और मैना को दुःखी देख कर नारद जी बोले कि जो ब्रम्हा जी ने ललाट पर लिख दिया वो तो अटल है तो भी मैं एक उपाय कहता हूं । जो जो मैंने वर के दोष बताए हैं वे सभी शंकर जी मे विद्यमान हैं। अगर पार्वती का विवाह शिवजी से हो जाता है तो यह सब अवगुण गुण ही माने जाएं गे । यदि तुम्हारी कन्या शिवजी को पाने के लिए तपस्या करे तो अवश्य ही शिवजी इन्हें अपनी पत्नी बनाएं गे। इतना कहकर नारद मुनि ब्रहम लोक को चले गए ।
हिमाचल और मैना बहुत दुखी थे। परन्तु उमा ने बहुत भांति से माता-पिता को समझाया और प्रसन्न मन से तप करने चल दी।
जय मां गौरी
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