सम्पूर्ण रामचरित मानस चौपाई दोहा अर्थ सहित बालकांड भाग ( 5 )

जय श्री राम ।

       यहाँ गोस्वामी तुलसीदास जी राम नाम की महिमा का वर्णन कर रहे हैं इस नाम के दोनों अक्षर रकार् व मकार् भक्तों को सुख देने वाले और कल्याण करने वाले हैं । ये दोनों अक्षर अमृत और संतोष के समान है जो  भक्तों के मन रूपी भ्रमर के लिए कमल की तरह है । ये सब वर्णो पर छत्र और मुकुट के समान शोभा पाते हैं ।


इस प्रकार नाम का प्रभाव प्रभू के निर्गुण स्वरूप से कहीं बढ़ा है और उसकी महिमा अपार है । इसीलिए तुलसीदास जी कहते हैं कि राम से भी बढ़ा उनका नाम  है।





 श्री राम चन्द्र जी ने अपने भक्तों को सुख देने के लिए नर का शरीर धारण करके संकट सहते हुए साधू पुरूषों को सुखी किया परंतु प्रेम से नाम का जप करने वाले अनायास ही  तर  जाते हैं । राम जी ने तो केवल एक मात्र अहिल्या का ही उद्धार किया है प्रंतु नाम ने तो कितने ही भक्तों का उद्धार किया ।

       नाम और नामी में कोई अंतर नहीं है ये वो शक्तियां हैं  जिनका आवाह्न किया जाता है जो ईश्वर की उपाधियां हैं जिन्हें अकथ और अनादि बताया गया है ।

       तुलसीदास जी कहते हैं कि यदि आप अपने भीतर और बाहर प्रकाश देखना चाहते हैं तो अपनी जिह्वा रूपी द्वार पर राम नाम रूपी दीपक रख लो ।

       संसार में चार प्रकार के भक्त होते हैं और ये चारों ही निष्पाप,  पुण्यात्मा,  और  उदारशील कहे जाते हैं ।

जय श्री राम जी । 







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