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Showing posts from May, 2020

Goswami Tulsi Das Ji

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जय श्री राम        जिस रामायण को महर्षि वाल्मीकि जी ने  संस्कृत में रचा । उसी रामायण को गोस्वामी तुलसीदास जी ने सरल भाषा में रामचरित मानस के रूप मे लिखा । जिस से कि जन साधारण भी आसानी से इस समझ सके और  पढ़ सके ।        गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म  सम्वत 1554 मे यमुना के किनारे दुबे पूरा गाँव में माना जाता है । इनके पिता का नाम आत्माराम दुबे और माता का नाम हुलसी था । बाल्यावस्था में ही इनके माता पिता का स्वर्गवास हो गया था। अतः इनका लालन पालन एक साधू नर हरिदास जी ने किया  जो बाद में इनके गुरू भी बने ।        इनके बारे में कहा जाता है कि इन्हें अपनी पत्नी से बहुत प्रेम था। एक दिन इनकी पत्नी अपने मायके चली गई तो इनका घर में अकेले बिलकुल भी मन नही लगा अतः ये आधी रात को यमुना पार कर  अपनी  ससुराल जा पहुंचा । ये बात  इनकी पत्नी को अच्छी नही लगी। अतः उसने अपने पति से हंसी मे कहा कि धिक्कार है तुम्हारे एसे प्रेम को। अगर एसा प्रेम आप ने भगवान से किया होता तो तुम्हारा...

Sarasawati Vandana

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       भारतीय परंपरा में  ज्ञान-विद्या,नृत्य, संगीत, कला आदि की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती का विशेष महत्त्व है। सरस्वती जी का जन्म  ब्रह्मा के मुख  से  हुआ। वाणी की अधिष्ठातरी देवी सरस्वती जी को कई नामों से जाना जाता है ।        वाणी,  वाग्देवी,  शारदा,  वागेश्वरी,  भारती , वीणा वादिनी,  हंसवाहिनी , श्वेत वस्त्र धारिणी , इत्यादि इनके  कई नाम है । माघ की शुक्ल पक्ष की पंचमी को इनकी पूजा की जाती है ।        श्वेत  वस्त्र धारण किये हंस पर बैठे हुऐ इन्हें  दिखाया जाता है । सरस्वती जी के एक हाथ मे वीणा, और दूसरे हाथ में वेद होते हैं श्वेत वस्त्र  इनके सच्चे और शुद्ध ज्ञान का प्रतीक है ।              पढ़ने वाले विद्यार्थी और संगीत की शिक्षा लेने वालों को माता सरस्वती की आराधना करनी चाहिए । कला क्षेत्र से सम्बंधित सभी व्यक्ति माॅ सरस्वती की पूजा करते हैं ।      ...

Guru Vandana

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गुरूर ब्रहमा  गुरूर  विष्णु गुरूर देवो महेश्वरः  गुरूर साक्षात परं ब्रहम तस्मय श्री गुरूवे नमः        गुरू को ब्रह्मा कहा गया है क्योंकि वह शिष्य को बनाता है उसे नया जन्म देता है । गुरू को विष्णु कहा गया है क्योंकि वह शिष्य की बुराई से रक्षा करता है और उसे इस काबिल बनाता है कि वह अपने परिवार का पालन कर सके । गुरू को महेश्वर कहा गया है क्योंकि वह शिष्य के सभी दोषों का संहार करता है ।        अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले को गुरु कहते हैं । गुरू वह है जो प्रकाश का निराकरण करता है अथवा जो धर्म का मार्ग दिखाता है । गुरू को ईश्वर से भी ऊॅचा दरजा दिया गया है । गुरू अथवा ज्ञान का वह प्रकाश पुंज जो शिष्य के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर उसे काबिल इंसान बनाता है ।        सनातन धर्म में गुरू और शिष्य की परम्परा अनंत काल से चली आ रही है । रामायण महाभारत काल मे भी गुरू से शस्त्र और शास्त्र दोनों की शिक्षा प्राप्त कर बड़े बड़े राजाओं ने अपने जीवन को धन्य किया है ।   ...

Ganesh vandana

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जय श्री राम        सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाशक,विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन। ये सभी  गणेश जी के प्रसिद्ध नाम हैं।        गणेश  जी  शिवजी और पार्वती के पुत्र हैं। उनका वाहन मूषक ( चूहा ) है। गणों के स्वामी होने के कारण उनका एक नाम  गणपति भी  है । हाथी जैसा सिर होने के कारण उन्हें गजानन भी कहते हैं। किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले गणेश जी का  नाम लिया जाता है ।  इसलिए इन्हें प्रथमपूज्य भी कहते हैं।        भगवान श्रीगणेश बुद्धि और कौशल के देवता हैं। उनकी आराधना कर अर्थ, विद्या, बुद्धि, विवेक, यश, प्रसिद्धि, सिद्धि सहजता  से प्राप्त हो जाते है।        गणेश की जन्म कथा भी बहुत ही अद्भुत और अलौकिक है। इनका जन्म अन्य देवताओं की भांति अपनी माता (पार्वती) के गर्भ  से नहीं हुआ, बल्कि माता पार्वती ने उन...

Ram Charit Manas with chopai Doha Arath

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जय श्री राम ।         रामचरितमानस तुलसीदास जी द्वारा रचित एक धार्मिक ग्रन्थ है जो श्री राम चन्द्र जी के जीवन पर आधारित है । राम चन्द्र जी को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है । किस तरह उन्होंने मर्यादा में रहते हुए हर एक काम को हर फर्ज को हर रिश्ते को बहुत ही खूबसूरती से निभाया ।          रामचरित मानस का हर किरदार अपने-आप में एक मिसाल है । पिता का अपने पुत्रों के प्रति प्रेम,  भाईयों का प्रेम,  पत्नी का सहयोग , और राजा का धर्म । सब कुछ अपने-आप में एक मिसाल है ।          शिक्षा की बात करें तो जितनी शिक्षा एक इंसान को रामचरित मानस से मिलती है ओर कहीं भी नहीं । एक राजा को कैसा होना चाहिए,  पुत्र को कैसा होना चाहिए,  पति-पत्नी को कैसा होना चाहिए,   भाईयों को कैसा होना चाहिए । और सबसे बढ़कर एक इंसान को कैसा होना चाहिए । कैसे एक इंसान के अंदर प्यार और दया की भावना होनी चाहिये । ये सब रामचरित मानस के अंदर हमें देखने को मिलता है ।         आज के समय में जहां हमा...