श्री राम कथा की महिमा। बालकांड भाग सात (7)

जय श्री राम जी 🙏🙏🙏🙏
      
       राम कथा का वर्णन करते हुए गोस्वामी श्री तुलसारामजी जी लिखते हैं कि मैंने अपने गुरूदेव जी से जिस प्रकार से और जैसे-जैसे भी राम कथा सुनी है। वो सब मैं अपनी बुद्धि के अनुरूप जो जैसा मुझे समझ आया वही मैं यहाँ भाषा बद्ध करूगा । यद्यपि मेरे गुरू देव मुझे बारम्बार यह कथा विस्तार से समझाते रहे तथापि मेरी अल्प बुद्धि इसे बहुत थोड़ा समझ पाई।

       यह राम  कथा पंडित व बुद्धि जनों को आराम देने वाली और सर्वसाधारण लोगों को भी प्रसन्न करने वाली तथा कलयुग के पापों का विशेष नाश करने वाली है। यह राम कथा कलयुग रूपी सांप के लिए मोरनी है तथा अच्छे व विवेक मनुष्यों के लिए कामधेनु गौं के समान है। यह राम कथा श्री राम चन्द्र जी को तुलसी वृक्ष के समान प्रिय है और मुझ तुलसीदास के लिऐ तो माता हुलसी की तरह हित करने वाली है

       यह राम कथा श्री शंकर जी को नर्मदा नदी के समान प्रिय है और समस्त सिद्धियों को प्राप्त करने के लिए सम्पदा की खान है । इस प्रकार यह राम कथा मंदाकिनी के समान है जो  इस चित्रकूट रूपी चित में बहती है। यह स्नेह रूपी वह वन है जिसमें श्री राम सीता जी के विहार का वर्णन है

      यह राम चरित्र ज्ञान वैराग्य और योग का सदगुरू है यह संसार के भयंकर रोगों का नाश  करने के लिए देवताओं के वैद्य अश्विनी कुमार के समान है । राम भक्तों के लिए यह कथा कल्प वृक्ष के समान है।

       इस प्रकार श्री राम चन्द्र जी अनन्त हैं और उनके गुण भी अनन्त है उनकी कथा का विस्तार भी अपार है। अतः जो निर्मल बुद्धि वाले लोग इस कथा को सुन कर अत्यंत सुख व आनन्द अनुभव का अनुभव करते हैं ।

जय श्री राम जी 🙏🙏🙏🙏🙏


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