सम्पूर्ण रामचरित मानस चौपाई दोहा अर्थ सहित बालकांड भाग ( 6 )
जय श्री राम जी ।
सतयुग में ध्यान करने से , त्रेता युग में यज्ञ करने से , द्वापर युग में पूजा करने से प्रभू प्रसन्न होते थे परन्तु कलयुग में तो केवल नाम का जप करने से ही संसार की समस्त आपदाओं का नाश हो जाता है ।
प्रभू का नाम चाहे भाव से, कुभाव से, ईर्ष्या से या आलस्य से कैसे भी लिया जाए सदा कल्याण ही करता है । इसी नाम का सहारा लेकर मैं प्रभू की इस सुन्दर कथा का वर्णन कर रहा हूँ वही मेरी इस कथा की रचना के प्रयास को सफल करें गे।
जय श्री राम ।
सतयुग में ध्यान करने से , त्रेता युग में यज्ञ करने से , द्वापर युग में पूजा करने से प्रभू प्रसन्न होते थे परन्तु कलयुग में तो केवल नाम का जप करने से ही संसार की समस्त आपदाओं का नाश हो जाता है ।
प्रभू का नाम चाहे भाव से, कुभाव से, ईर्ष्या से या आलस्य से कैसे भी लिया जाए सदा कल्याण ही करता है । इसी नाम का सहारा लेकर मैं प्रभू की इस सुन्दर कथा का वर्णन कर रहा हूँ वही मेरी इस कथा की रचना के प्रयास को सफल करें गे।
जय श्री राम ।
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