सम्पूर्ण रामचरित मानस चौपाई दोहा अर्थ सहित बालकांड भाग ( 3 )

जय श्री राम ।

एहि मैं रघुपति नाम उदारा अति पावन पुराण श्रुति सारा
मंगल भवन अमंगल हारी उमा सहित  जहं जपत पुरारी
      
       इसमें उदार श्री राम जी का चरित्र है जो बड़ा पवित्र और वेदों पुराणों का सार है वह नाम मंगल का घर और  अमंगल को हरने वाला है जिसको पार्वती जी सहित श्री शिवजी ने भी जपा है ।

       तुलसीदास जी कहते हैं कि मेरी बुद्धि छोटी है और मेरी कविता भी भद्दी है । मुझ मे लिखने का कोई गुण नहीं ना ही मुझे कविता के अंगों का कोई विशेष ज्ञान है। तथापि इस में श्री राम चन्द्र जी की मंगल करने वाली कथा रस का वर्णन है इस से मेरी यह भद्दी रचना भी संसार मे यश पाएगी और लोकप्रिय हो जाए गी और सब मनुष्यों को एसे प्रिय लगेगी जैसे शमशान की भस्म अपवित्र होते हुए भी शिवजी के शरीर को लग कर अत्यंत पवित्र हो जाती है ।




   जैसे चंदन का उपयोग उसकी खुशबू के कारण किया जाता है । काली गाय का दूध हितकारी समझ कर उपयोग होता है एसे ही मेरी इस कविता को राम नाम के कारण पवित्र समझ कर  गुणीजन व ज्ञानी लोग इसे गाएंगे गे और सुनेंगे ।

       तुलसीदास जी कहते हैं कि मैं मंदबुद्धि श्री वाल्मीकि और श्री व्यास आदि कवि और मुनियों का सहारा लेकर और उनके चरणों में वंदना कर के अपने इस ग्रंथ की रचना करूंगा । प्रभु श्री राम चन्द्र जी मुझे एसा आशीर्वाद दें जिससे मेरी यह कविता पंडित व ज्ञानी लोगों मे आदरणीय हो ।


जय श्री राम । 





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