Sarasawati Vandana
भारतीय परंपरा में ज्ञान-विद्या,नृत्य, संगीत, कला आदि की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती का विशेष महत्त्व है। सरस्वती जी का जन्म ब्रह्मा के मुख से हुआ। वाणी की अधिष्ठातरी देवी सरस्वती जी को कई नामों से जाना जाता है ।
वाणी, वाग्देवी, शारदा, वागेश्वरी, भारती , वीणा वादिनी, हंसवाहिनी , श्वेत वस्त्र धारिणी , इत्यादि इनके कई नाम है । माघ की शुक्ल पक्ष की पंचमी को इनकी पूजा की जाती है ।
श्वेत वस्त्र धारण किये हंस पर बैठे हुऐ इन्हें दिखाया जाता है । सरस्वती जी के एक हाथ मे वीणा, और दूसरे हाथ में वेद होते हैं श्वेत वस्त्र इनके सच्चे और शुद्ध ज्ञान का प्रतीक है ।
पढ़ने वाले विद्यार्थी और संगीत की शिक्षा लेने वालों को माता सरस्वती की आराधना करनी चाहिए । कला क्षेत्र से सम्बंधित सभी व्यक्ति माॅ सरस्वती की पूजा करते हैं ।
रामचरित मानस शुरू करने से पहले माता सरस्वती जी की वंदना की गई है । माॅ सरस्वती कृपा से ही ये कथा कहना सम्भव हो पाए गा ।
यह सरस्वती वंदना श्री संजीव चौहान जी द्वारा गाई और लय बद्ध की गई है ।
जय श्री राम
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