Ganesh vandana
जय श्री राम
सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाशक,विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन। ये सभी
गणेश जी के प्रसिद्ध नाम हैं।
गणेश जी शिवजी और पार्वती के पुत्र हैं। उनका वाहन मूषक ( चूहा ) है। गणों के स्वामी होने के कारण उनका एक नाम
गणपति भी है । हाथी जैसा सिर होने के कारण उन्हें गजानन भी कहते हैं। किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले गणेश जी का
नाम लिया जाता है । इसलिए इन्हें प्रथमपूज्य भी कहते हैं।
भगवान श्रीगणेश बुद्धि और कौशल के देवता हैं। उनकी आराधना कर अर्थ, विद्या, बुद्धि, विवेक, यश, प्रसिद्धि, सिद्धि सहजता
से प्राप्त हो जाते है।
गणेश की जन्म कथा भी बहुत ही अद्भुत और अलौकिक है। इनका जन्म अन्य देवताओं की भांति अपनी माता (पार्वती) के गर्भ
से नहीं हुआ, बल्कि माता पार्वती ने उन्हें अपने तन के मैल से निर्मित किया था। श्री गणेश ने नवजात शिशु के रुप में जन्म नहीं लिया
था, अपितु जन्म ही बाल रुप में लिया था।
जब श्री गणेश जन्में, तब उनका शीश गज जैसा नहीं था, अपितु देव तुल्य सामान्य ही था। जन्म के तुरंत बाद माता पार्वती स्नान
करने चली जाती है, और पुत्र गणेश को आज्ञा देती हैं, कि कोई भी अंदर प्रवेश न करने पाये। श्री गणेश अपनी माता की आज्ञा का
पालन करने हेतु माता के महल के प्रवेश द्वार पर खड़े होकर पहरेदारी करने लगे। इतने में पिता महादेव आ गये और अंदर जाने लगे।
चूंकि पिता और पुत्र दोनों एक दूसरे से अनभिज्ञ थे। गणेश के बाहर ही रोक देने से वे अत्यंत क्रोधित हो गए।
महादेव ने बहुत समझाया कि वो माता पार्वती के स्वामी है, पर बालक गणेश ने एक न सुनी और क्रोध में आकर महादेव ने बाल
गणेश का सिर काट दिया। जैसे माता पार्वती स्नान कर बाहर आयी, अपने बच्चे का सिर कटा शव देखा। वो क्रोध और दुःख से अत्यंत
व्याकुल हो उठी।
उन्होने महादेव से अपने बच्चे को जीवित करने को कहा, क्योंकि वो बच्चा तो केवल अपनी मां की आज्ञा का पालन कर रहा था।
तब श्रीहरि विष्णु ने हाथी का सिर लाकर महादेव को दिया और महादेव ने वो हाथी का सिर लगाकर बालक गणेश को पुनः जीवित कर
दिया। अपनी मां के प्रति इतनी अटूट भक्ति देखकर महादेव सहित सभी देवी-देवताओं ने गौरी पुत्र को आशीर्वाद दिया। और साथ ही\
पिता महादेव ने प्रथम-पूज्य का होने का आशीर्वाद दिया।
गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी के जन्मोत्सव को पूरे भारत वर्ष में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है । गणेश जी सभी बाधाओं को
दूर करते हैं इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है ।
रामचरित मानस शुरू करने से पहले श्री संजीव चौहान जी से सुनिए गणेश वंदना । जय श्री राम जय श्री गणेश जी
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